
करोड़ों का मुनारा मॉडल रेंज से लेकर आवास तक नए घोटाले की पटकथा , जुगलबंदी के खेल पर FIR की मांग तेज़ !
जीपीएम : – वनमंडल में इन दिनों सिर्फ निर्माण नहीं, नया खेल चल रहा है। कैम्पा मद से 2024–25 में मुनारा निर्माण, रेंज ऑफिस, डिपो आवास और ग्रामीण सड़कों के लिए करोड़ों की स्वीकृति आई लेकिन जमीन पर काम कम, और कहानी ज़्यादा दिख रही है। कहानी भी ऐसी कि निर्देश विभाग के हों, पर फैसले कहीं और लिखे जाएं। बताया जाता है कि यह पटकथा दो अतिरिक्त प्रभावशाली लोगों के हाथों में है बॉबी शर्मा और रेंजर प्रबल दुबे। आरोप है कि फाइल कौन देखेगा, भुगतान किसे मिलेगा, कौन-सा बिल पास होगा सबका हिसाब बॉबी शर्मा तय करता है। विभागीय लोग कहते हैं आदेश कोई भी दे… चलता उन्हीं का है।
जुगलबंदी का खेल किसके इशारे पर कौन नाच रहा है ?
रेंजर प्रबल दुबे की पोस्टिंग ऐसे समय हुई जब सीसीएफ प्रभात मिश्रा सेवानिवृत्त होने ही वाले थे। चर्चाएं तो यहाँ तक हैं कि कृपा विशेष से ही गौरेला रेंज का रास्ता खुला। मगर आज हालत यह है कि दुबे जी, अपने रेंज ऑफिस से ज़्यादा बॉबी शर्मा के संकेत-स्थल के आसपास दिखते हैं। वनमंडल से लेकर जिला स्तर तक इस जुगलबंदी की फुसफुसाहट नहीं खुली चर्चा है।
जाति की ढाल और पैरवी का बड़ा खेल !
जैसे ही निर्माण घोटाले की फाइलें बाहर आने लगीं, खेल अचानक काम से हटकर जाति के कवच में चला गया। लोग मज़ाक में कहते हैं गलती चाहे जिसकी भी हो… बचाव में जाति आगे, सबूत पीछे। बताया जा रहा है कि जैसे ही बॉबी शर्मा पर मुनारा घोटाले का साया आया, दुबे जी जातिगत मैनेजमेंट में जुट गए। उन्होंने सफाई दी बॉबी तो सिर्फ सप्लायर है। लेकिन विभाग के लोग कहते हैं यही सप्लाई की आड़ में पूरा सिस्टम फैला हुआ है।चारों नीतियाँ शाम, दाम, दंड, भेद लगाई गईं, पर खेल बचा नहीं। स्थिति यह है कि डीएफओ के चेंबर में भी बॉबी शर्मा का प्रवेश बिना किसी रोकटोक के होता है। मानो निर्णय बाहर नहीं… उसी कमरे में तैयार होते हों।
निर्माण कार्यों में बड़ा घोटाला कागज़ पर किला, जमीन पर खंडहर !
वनमंडल मरवाही में यही ठेकेदार मुनारे, रेंज ऑफिस, आवास और सड़कें बना रहा है। स्थानीय कर्मचारी और ग्रामीण साफ़ कहते हैं कागज़ में सब मजबूत… जमीन पर आधा-अधूरा। रेंज के अंदरूनी लोग बताते हैं जिन पर विभाग की मेहरबानी है, वजह सबको पता है… लेकिन बोलने का साहस किसी में नहीं।
जांच और FIR की मांग तेज़ !
मुनारा कितना भी ऊँचा हो, कहानी उससे ऊँची स्थानीय संगठन, कुछ कर्मचारी और जागरूक नागरिक अब पूरे प्रकरण की वित्तीय ऑडिट, विभागीय जांच और FIR की मांग कर रहे हैं। अब सवाल सिर्फ इतना है क्या विभाग कार्रवाई करेगा या मुनारे की ऊँचाई की तरह घोटाले की कहानी और ऊँची होती जाएगी?















